गुरुवार, 19 जून 2014

विश्वास ही तो है

विश्वास ही तो है
तुम्हारे मेरे प्यार की डोर
यक़ीन ही तो है
जिसने मिलाया है हमें
पहली बार
पहली नज़र में
दिल नहीं हारी थी मैं
तुम्हें देख के
विश्वास ही तो हुआ था
की तुम्हीं हो
मेरे लिए...
ख़ुदा ने
यक़ीन ही तो कराया था
की इसे ही
बनाया है तुम्हारे लिए
यक़ीन ही तो था
जो बिना सोचे
बिना जाने
तुमसे मांग लिया तुम्हें
ये भरोसा ही तो था तुम्हारा
जो संग हो लिए मेरे
तुम्हारे मेरे
रिश्ते की नींव
में विश्वास ही तो है
चलो इसी
विश्वास के साथ
जी लेते हैं
प्यार का पौधा
बड़ा कर लेते हैं....

रविवार, 2 मार्च 2014

मुझे भी बताना

जो सवाल
हरदम तुम
मुझसे करते हो
कभी
खुद भी
तलाशा है उसका जवाब
कभी जानने की
कोशिश की है कि
क्यों है
तुम्हें बेइंतेहा इश्क़
क्यों
छोटी छोटी
बातों की परवाह करते हो
मेरी मुस्कराहट के लिए
कुछ भी कर गुज़रते हो
उदासी भगाने  के लिए
क्यों जतन करते हो
क्यों तुम्हें
परेशान कर जाती है
मेरी खामोशी
क्यों
नही देख पते
मुझे निराश...
हर लम्हा
हर वक़्त
बस मेरी ख़ुशी
आखिर क्यों
जब तलाश लो
इनकी वजह
तो मुझे भी बताना
मैं भी
पता करुँगी
क्यों बन गए हो
तुम मेरी ख़ुशी
कब बन गए
तुम मेरी ज़िन्दगी

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

दग़ाबाज़ दोस्त....

कितने प्यार से
कितने अपनेपन से
तुमने दिया है धोखा
सबसे करीब होने का
दावा भी किआ था तुमने
अपने हर ज़ख़्म को
खोल के दिखाया था तुम्हें
अपने हर दर्द का
सांझेदार माना था तुम्हें
नम आँखों को दुनिया
से छुपाया हर दम
एक तुम ही थी
जिसे अपने अंदर की
बवंडर से मिलवाया था
आज हैरान हूँ
समझ नहीं पा रही
कि तुमने ऐसा क्यों किआ
मेरी पीठ पे छुरा क्यों घोंपा
तुम तो मेरी दोस्त थी
फिर क्यों
मेरे दर्द का
मेरी ज़िन्दगी का
तमाशा बना दिआ
गलती तुम्हारी नहीं
शिकायत खुद से है
मैंने तुमपे ऐतबार जो किआ
जाओ खुश रहो तुम
जाओ और तमाशा बनाओ तुम
लेकिन याद रखना
मुझसे मेरे हिस्से कि
खुशियां कोई नहीं छीन सकता
तुम भी नहीं
मेरी सबसे अच्छी दग़ाबाज़ दोस्त....