रविवार, 2 मार्च 2014

मुझे भी बताना

जो सवाल
हरदम तुम
मुझसे करते हो
कभी
खुद भी
तलाशा है उसका जवाब
कभी जानने की
कोशिश की है कि
क्यों है
तुम्हें बेइंतेहा इश्क़
क्यों
छोटी छोटी
बातों की परवाह करते हो
मेरी मुस्कराहट के लिए
कुछ भी कर गुज़रते हो
उदासी भगाने  के लिए
क्यों जतन करते हो
क्यों तुम्हें
परेशान कर जाती है
मेरी खामोशी
क्यों
नही देख पते
मुझे निराश...
हर लम्हा
हर वक़्त
बस मेरी ख़ुशी
आखिर क्यों
जब तलाश लो
इनकी वजह
तो मुझे भी बताना
मैं भी
पता करुँगी
क्यों बन गए हो
तुम मेरी ख़ुशी
कब बन गए
तुम मेरी ज़िन्दगी

2 टिप्‍पणियां:

parul chandra ने कहा…

बहुत अच्छा...

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत रचना |
उम्दा लेखन |