शनिवार, 14 दिसंबर 2013

खामोश तुम हम...

कार में
खामोश तुम हम
मद्धम मद्धम चलता
मेरी पसंद का गाना
ना जाने क्या सोच रही थी
ना जाने क्या चाह रही थी
थकान से चकनाचूर
आँखों में नींद
लेकिन
ना जाने क्या चल रहा था
हमारे बीच
ख़ामोशी बात कर रही थी
दिल इज़हार ए इश्क कर रहे थे
तुमने बहुत देर बाद
डरते हुए थाम लिया मेरा हाथ
कहा
क्यों खामोश रहती हो
आखिर किस बात से डरती हो
मैं तब भी चुप थी
और आज भी हूँ
कोई जवाब नहीं
इन सवालों के
कार दौड़ती रही
अपनी रफ़्तार से
और हम
फिर खामोश हो गए

7 टिप्‍पणियां:

Yashwant Yash ने कहा…

बहुत ही बढ़िया :)



सादर

Yashwant Yash ने कहा…

कल 18/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Kaushal Lal ने कहा…

सुन्दर .....

कव्यसुधा ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति , कुछ सवालों के जवाब ताउम्र नहीं मिलते ..

कालीपद प्रसाद ने कहा…

सुन्दर अभिव्याक्ति !
नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य (भाग १)
नई पोस्ट चंदा मामा

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

सुंदर भाव.............

संजय भास्‍कर ने कहा…

प्रशंसनीय रचना - बधाई
लम्बे अंतराल के बाद शब्दों की मुस्कुराहट पर ....बहुत परेशान है मेरी कविता