शनिवार, 21 दिसंबर 2013

सरे बाज़ार मार दी गयी...

सरे बाज़ार
मार दी गई
मुझे गोली
सरे बाज़ार
उड़ा दी गईं
क़ानून की धज्जियाँ
हौसला दिखाया था मैंने
हिम्मत कि थी मैंने
अपनी अस्मिता, इज़ज़त
को चकनाचूर होने से
बचाने को कोशिश कि थी
लेकिन हौसला तो देखिये
मुझे अपनी संम्पति समझने वालों का
नहीं बर्दाश्त कर पाये मेरी ना
क़त्ल कर दिया  मुझे
तब
जब देश याद कर रहा था
निर्भया को
उसी वक़्त
मार दी गई
एक और निर्भया...












 

5 टिप्‍पणियां:

rahul misra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (22-12-2013) को "वो तुम ही थे....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1469" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!!

- ई॰ राहुल मिश्रा

कालीपद प्रसाद ने कहा…

दूसरी निर्भया, सुन्दर अभिव्यक्ति !
नई पोस्ट चाँदनी रात
नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य ( भाग २ )

काव्यसुधा ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं मार्मिक , निर्भय तो एक सिम्बल है चूकि घटना दिल्ली में हुई , रोज कितनी निर्भय मार दी जाती है , बलात्कार का शिकार होती है ..

बेनामी ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं मार्मिक , निर्भय तो एक सिम्बल है चूकि घटना दिल्ली में हुई , रोज कितनी निर्भय मार दी जाती है , बलात्कार का शिकार होती है ..

Neeraj Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं मार्मिक , निर्भय तो एक सिम्बल है चूकि घटना दिल्ली में हुई , रोज कितनी निर्भय मार दी जाती है , बलात्कार का शिकार होती है ..