बुधवार, 25 दिसंबर 2013

चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें

चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें
अपना हाले दिल सुनाती हूँ तुम्हें
किस तरहा जीती हूँ तुम्हारे बगैर
हर ज़ख्म खोल के दिखाती हूँ तुम्हें...
तुमने बदले रास्ते और मंजिल अपनी
मैं तेरे इंतज़ार में खड़ी हूँ बताती हूँ तुम्हें
चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें....
संग जीने मरने की खाई थी कसमें तुमने
हर भूला  वादा याद दिलाती हूँ तुम्हें
हर रोज़ मुझसे मिलने को तड़पते थे तुम
इक लम्हा भी जुदाई से डरते थे तुम
वो हर लम्हां हर वक़्त याद दिलाती हूँ तुम्हें
चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें...
मेरे आगोश में हर ग़म से सुकून पाते थे
मेरे पहलु में हर परेशानी भूल जाते थे
अब सूना पड़ा है मेरा दामन तब से
उसकी वीरानगी दिखाती हूँ तुम्हें
चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें...
मेरी आँखों में डूबने की ख्वाइश थी तेरी
अब ये पथराई नज़रें दिखाती हूँ तुम्हें
चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें
ज़िन्दगी बेरंग बेज़ार नज़र आती है
फिर भी तेरी याद चली आती है
कैसे जीती हूँ तेरी यादों के सहारे अब
इक बार नज़रे इनायत हो तो बताती हूँ तुम्हें
चलो हर बात बताती हूँ तुम्हें
अपना हाले दिल सुनाती हूँ तुम्हें....

4 टिप्‍पणियां:

parul chandra ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना... बधाई

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत खुबसूरत एहसास की सुन्दर अभिव्यक्ति !
नई पोस्ट मेरे सपनो के रामराज्य (भाग तीन -अन्तिम भाग)
नई पोस्ट ईशु का जन्म !

मिश्रा राहुल ने कहा…

बहुत सुंदर रचना....
कभी पधारिए हमारे ब्लॉग पर भी.....
नयी रचना
"एहसासों के "जनरल डायर"
आभार

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर....बहुत कोमल भाव